Sad shayri
मुकद्दर की लिखावट का इक ऐसा भी कायदा हो,
देर से क़िस्मत खुलने वालों का दुगुना फ़ायदा हो।
____________________________________
मैं एक नासमझ ही सही मगर वो तारा हूँ जो,
तेरी एक ख्वाहिश को पूरा करने के लिए सौ बार टूट जाऊं।
____________________________________
आखिर क्यों उलझती रहती है मैं लोगो से,
ये जरूरी तो नहीं ये चेहरा सभी को प्यारा लगे।
____________________________________
वो पहले सा कहीं मुझको कोई मंज़र नहीं लगता,
यहाँ लोगों को देखो अब ख़ुदा का डर नहीं लगता।
____________________________________
आ भी जाओ मेरी आँखों के रूबरू अब तुम,
कितना अब ख्वावों में तुझे और तलाशा जाए।
____________________________________
अल्फ़ाज़ चुराने की ज़रूरत ही ना पड़ी कभी मुझे,
तेरे बे-हिसाब ख्यालों ने मुझे बे-तहाशा लफ्ज़ दिए।
____________________________________
आसान नही होता है आबाद करना घर मोहब्बत का,
ये तो उनका काम हे जो अपनी ज़िदगी बरबाद करते हैं।
____________________________________
तू घड़ी भर के लिए मेरी नज़रो के सामने तो आजा,
एक मुद्द्त से मैंने खुद को अभी तक आईने में नहीं देखा।
____________________________________
कितनी जल्दी दूर चले जाते है वो लोग,
जिन्हें हम जिंदगी समझ कर कभी भी खोना नहीं चाहते।
____________________________________
आज कोई नया जख्म नहीं दिया उसने मुझे,
कोई पता करो वो ठीक तो है ना।
____________________________________
कहाँ नहीं है तेरी इन यादों के कांटे,
अब कहाँ तक कोई अपना दामन बचा के चले।
____________________________________
दम तोड़ जाती है हर शिकायत लबों पे आकर,
जब मासूमियत से वो कहती है कि मैंने क्या किया है?
____________________________________
उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं,
ये दिल उसका है अगर अपना होता तो बात और थी।
____________________________________
उस दिल की बस्ती में आज अजीब सा सन्नाटा हैं ,
जिस में कभी तेरी हर बात पर महफ़िल सज़ा करती थी।
____________________________________
तेरा नज़रिया मेरे नज़रिये से कहीं अलग था,
शायद तुझे अपना वक्त गुज़ारना था और मुझे तेरे साथ अपनी जिन्दगी।
____________________________________
डरता हूँ कहने से की मोहब्बत है तुम से,
कि मेरी जिंदगी बदल देगा तेरा इकरार भी और इनकार भी।
____________________________________
सलीक़ा हो अगर भीगी हुई आँखों को पढने का,
तो फिर बहते हुए आंसू भी अक्सर बात करते हैं।
____________________________________
ये भी एक तमाशा है इश्क ओ मोहब्बत में,
दिल किसी का होता है और बस किसी का चलता है।
____________________________________
मेरा वक़्त बोला मेरी हालत को देख कर,
मैं तो गुजर रहा हूँ तू भी गुजर क्यों नहीं जाता।
____________________________________
जागना भी कबूल हैं मुझे तेरी यादों में रात भर,
तेरे एहसासों में जो सुकून है वो इन नींद में कहाँ ।
____________________________________
इतना ही गुरुर है तो मुकाबला इश्क से कर ऐ बेवफा,
हुस्न पर क्या इतराना जो मेहमान है कुछ दिन का।
____________________________________
कमाल का जिगर रखते है कुछ लोग,
दर्द पढ़ते है और आह तक नहीं करते।
____________________________________
ना मैं शायर हूँ ना मेरा शायरी से कोई वास्ता,
बस एक शौक सा बन गया है तेरे जलवों को बयान करना
____________________________________
मुस्कुरा देता हूँ अक्सर देखकर पुराने खत तेरे,
तू झूठ भी कितनी ईमानदारी से लिखती थी।
____________________________________
एक उमर बीत चली है मेरी यूं तुझे चाहते हुए,
लेकिन तू तो आज भी बेखबर है कल की तरह।
____________________________________
तेरी गली में आकर के खो गये हैं दोंनो,
मैं दिल को ढ़ूँढ़ती हुँ और ये दिल तुमको ढ़ूँढ़ता है।
____________________________________
लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी,
पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया
____________________________________
चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही,
रवैये अजनबी हो कर बडी तकलीफ देते हैं।
____________________________________
ना जाने वक्त खफा है या खुदा नाराज है हमसे,
दम तोड़ देती है हर खुशी मेरे घर तक आते आते।
____________________________________
पत्थर भी तो अब मुझसे किनारा करने लगे,
कि तुम ना सुधरोगे मेरी ठोकरे खा कर।
Comments
Post a Comment